विधि प्रदर्शन(Method demonstration)
विधि प्रदर्शन (Method demonstration)
यह विधि प्रसार के सिद्धांत "देखकर विश्वास करना तथा कार्य करके सीखना" पर आधारित है जिसमें ग्रामीण लोगो को सभी इन्द्रियों का उपयोग होता है इसलिए सीखने की प्रक्रिया भी अधिकतम एवं प्रभावशाली होती है। इस विधि में कृशको एवं पशुपालको को पुरानी तकनीकों को बेहतर ढंग से सम्पन्न करने के तरीको को बताया जाता है एवं नवीन तकनीको को फार्म एरिया मं कैसे किया जाए यह बताया जाता है जैसे पशुओं के लिए प्रोटीन स्त्रोंत के रूप में आजोला की खेती कैसे की जाए। इस प्रक्रिया में प्रसार कार्यकर्ता पहले स्वयं पूर्ण प्रक्रिया सम्पन्न करके बताता है उसके बाद कृशक वही प्रक्रिया करता है जिससे की बह इसे अच्छी तरह सीख जाए। इस प्रकार विधि प्रदर्शन से लोगो को कार्यकुशलता सिखाई जाती हैं जिससे वह उसी काम को सरलता एवं शीघ्रता से कर सकें। अतः यह विधि नई तकनीकों को कुशलता के साथ प्रभावशाली रूप से स्थानान्तरीत करने में सहायक होती हैं।
विधि प्रदर्शन में निम्न प्रकार की पद्धतियॉ दिखाई जा सकती हैं -
1.वर्मी कम्प्पोस्ट बनाना।
2.अजोला की खेती।
3.ब्रुडर तैयार करना।
4.चूहो की रोकथाम करना।
5.पशुपालन एवं कृशि उपकरणों का उपयोग करना।
6.पशुओं से दूध निकालने की विधि ।
7. दूध के उत्पोत्पाद बनाना।
विधि प्रदर्शन में क्रमबद्धता-
1.उन्नत विधि का चुनाव
2.उन्नत विधि को सम्पूर्ण जानकारी प्राप्त करना।
3.प्रदर्शन की तैयारी।
4.प्रदर्शन का अभ्यास
5.प्रदर्शन निश्पादन
6.विधि का निरीक्षण
7.स्थानांतरण
लाभ-
1.लोंगो के कार्य कुशलता बढती हैं।
2.लोग नई पद्विती अपनाने के लिए प्रेरित होते है क्योंकि इससे उनका
विश्वास नवीन पद्धति पर बनता हैं।
3.ग्रामीणों में नेतृत्व की क्षमता का विकास होता हैं।
4.प्रसार कार्यकर्ता की पहले कुशल होना अनिवार्य हैं ।
5.अधिक सामग्री की आवश्यकता होती हैं।
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