पोस्टर(poster)


पोस्टर(poster)


पोस्टर बनाने के चरण-
पोस्टर या विज्ञापन किसी कार्यकम, पद्धति या विचार के प्रति लोगों का
ध्यानाकर्षण का चित्रित नारा है। यह कार्ड बोर्ड या कागत की एक सीट पर बनी है। जिस पर कुछ साधारण शब्दो के साथ कुछ चित्र बना होता है। लोग पोस्टर को दूर से देख सकते है। यदि उद्देश्य संबंधित कोई चिज लोगों को आकर्षित करती है तो वे उसे ठहर कर देखते है। यह व्यक्तियों का ध्यान आकर्षित कर, उन पर तथ्यों की छाप डालने के लिये संदेश पहुचाने तथा तुरन्त ही किया करने के प्रति प्रभावित करती
है। इसका आकार 24"x36" उचित रहता है।

पोस्टर की विशेषता-

1.लोगों का ध्यान आकर्षित कर उनकी अभिरूचि उत्पन्न करती है।
2.तुरन्त संदेश देती है।
3.यह लोगो की कार्य करने के लिये प्रेरित करती है।

लाभ-

1.लोगो का ध्यान नये विचार पर केन्द्रित करना।
2.पूर्ण सूचना प्रदर्शित करना।
3.कम समय में बहुत लोगों तक सूचना पहुॅँचा देता है।
4.लोगों को कार्य करने के लिये प्रेरित करती है।

पोस्टर के लक्षण

1.पोस्टर में 5 शब्द से ज्यादा नही होना चाहिए ।
2.थोड़े शब्दों का उपयोग कर पूर्ण सूचना होनी चाहिए।
3.नये विचारों पर केन्द्रित हो।
4.महत्वपूर्ण स्थनों पर प्रदर्शित हो।
5.आकृति विचार का नाटकीय दृष्य उपस्थित करें।


नियोजन-

1.पोस्टर किसी विषय पर तथा मुख्य बिन्दुओं पर निर्धारित हों।
2.पोस्टर का आकार, अक्षरों का आकार रंगो का उपयोग आदि अच्छा उपयोग करना चाहिए। जिससे यह लोगो का ध्यान आकर्षित करने में सक्षम हो।
3.पोस्टर की कितनी प्रति बनानी है, यह बजट की उपलब्धता पर आधारित होना चाहिए।
4.यह विचार होना चाहिए की पोस्टर कब तक तैयार करना है।

तैयार करने के बिन्दु-

1.छोटे लेकिन वास्तविक आकर में पोस्टर के बहुत सारे प्रतिरूप तैयार करना चाहिए।
2.शब्दों और चित्रों के बीच सामजस्य स्थापित करना चाहिए। चित्र बडे और संक्षिप्त होने चाहिए।
3.आकर्षण बनाने के लिए रंगो का उचित चुनाव करना चाहिए। चित्र एवं शब्द बेकग्राउण्ड के साी स्पष्ट होने चाहिए।
4.बहुत अच्छे रंगों का चुनाव करे। यदि किसी कलाकार की जरूरत पडे तो उसकी मदद लेनी चाहिए।
5.प्रेस मैनेजर से बातचीत करके, पोस्टर बनाने में लगने वाली लागत पर चर्चा कर लेनी चाहिए।
6.आकार (20"x30")

प्रदर्शन की विधि-

1.पोस्टर ऐसी जग लगाना चाहिये जहाँ रोशनी की उत्तम व्यवस्था हो तथा जहाँ से अधिक लोग निकलते हों।
2.महत्वपूर्ण स्थानों पर प्रदर्शित करें।
3.विज्ञापन का काम करना।
4.पूर्ण संदेश प्रदर्शित करना।

प्रदर्शन के बाद के चरण-

1.लोगो की प्रतिक्रिया देखनी चाहिए।
2.लोगों को उत्साहित करना चाहिए।

सीमा-
1.यह लोगों में नये विचार लाता है, लेकिन इसकी सम्पूर्ण जानकारी नहीं दे पाता।
2.अच्छे पोस्टर बनाने के लिये अच्छी कुशलता, कार्य में दक्षता, समय और पेसे की जरूरत पड़ती है।
3.बार-बार एक ही पोस्टर एक ही स्थान पर नहीं लगा सकते। हर नयी
तकनीक के लिये नये पोस्टर बनाने पड़ते है।

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