दुग्ध अभिलेख ( Milk records)

दुग्ध अभिलेख   (Milk records)

परिभाषा

एक दुधारू पशु, अपने ब्यात (Lactation) में कितना दुध का उत्पान किया है इसको प्रति दिन के हिसाब से संधारण करने अथवा लेखा- जोखा रखने को ही मिल्क रिकार्डिंग कहते है।

दुग्ध उत्पादन पर असर डालने वाले कारक


  1. पशु की नस्ल
  2. पशु की उम्र
  3. ब्यात(No.of Lactation)
  4. पशु के शरीर का आकार
  5. पशु प्रबन्धन


  • आवास व्यवस्था
  • पशु का आहार
  • पशु का रख रखाव आदि।

 जैस- गर्भकाल के समय, प्रसव के  समय तथा प्रसव के बाद आदि।
       6.पशु स्वास्थ्य

  •  बछडे को मॉ से हटाना (Weaning)
  •  समय पर टीकाकरण
  •  अस्वस्थ होने पर तुरन्त उपचार की सुविधा आदि।


पशु उन्नत नस्ल का होते हुए भी उपरोक्ति कारको का यदि ध्यान नही रखा जाता है तो पशु उस ब्यात काल (Lactation Period) में दूध कम देगा और इसका असर मिल्क रिकार्डिंग पर पडेंगा।

मिल्क रेकार्डिंग के लाभ 

A. पशु का प्रति ब्यात पर दुग्ध उत्पादन का पता लगंना :


मिल्क रेकार्डिग करने हेतु प्रत्येक मादा पशु का प्रत्येक प्रसव के बाद प्रति ब्यात प्रतिदिन का कितना दुध देतेा है इसका लेखा जोखा एक पंजिका में रखा जाता है अर्थात इस मिल्क रेकार्डिंग पंजिका में देखने से उस पशु ने प्रति व्यात कितना दुध दिया है पता लग जाता है।


B. पशु के रखने से हानि व लाभ का पता लगना:


मादा पशु पर प्रति ब्यात कुल कितना खर्चा किया गया तथा उसके
उत्पादन से कुल कितनी राशि प्राप्त हुई इन सबका ब्योरा भी मिल्क
रेकार्डिंग पंजिका की सहायता पंजिकाओं में किया जाता है। अतः इसी
पंजिका को देखने से फिर पता लगता है कि यह पशु लाभ दे रहा है।
अथवा फार्म को नुकसान दे रहा है।

C. निष्कासन (Culling)


जो पशु लगातार हानि दे रहा है उस पशु को मिल्क रेकार्डिंग के आधार
पर निष्कासन करके अर्थात पशु को बेचकर, फार्म को लाभ की स्थिति में लाया जा संकता है।

D. पशु के हानि देने के कारणो का पता लगना :


यदि पशु हानि दे रहा हो तो उसको Culling करने से पहले निम्न कारणो का पता भी मिल्क रेकार्डिंग के माध्यम से लगाया जा सकता है।


  1. पशु ने कब - कब, किस-किस समय दूध कम दिया।
  2. क्या पशु उन दिनों में बिमार तो नहीं हो गया था।
  3. बीमार पशु का समय पर इलाज हुआ या नही।
  4. पशु ने जब दूध कम दिया क्या उन दिनों में उस पशु को ताव में तो नही था। 
  5. यदि ताव में था तो क्या उसे समय पर गर्भित करवाया या नहीं।
  6. पशु गर्भित है या नही।
  7. सब कुछ ठीक है फिर भी दुध का उत्पादन रेकार्ड में कम है कही
  8. दुध की चोरी तो नही हो रही है।
  9. पशु का रख रखाव जैसे सन्तुलित आहार आदि समय पर दिया जा रहा है या नही। 
  10. कहने का तात्पर्य यह है कि मिल्क रेकार्डिंग सही व सुचारू रूप से रखा जायेगा तो उपरोक्त कारणों का पता तुरन्त लग जायेगा।


E. दुग्ध प्रतियोगिता के लिए दुध अभिलेख के माध्यम से ही चयन सम्भव हैं।


F.पशु का मिल्क रेकार्डिंग होता है तो अच्छे जानकार अनुभवी पशुपालक आपको अच्छा विक्रय मुल्य भी देंगे।


G.जब विभाग द्वारा उन्नत नस्ल के प्रजनन हेतु नर साण्ड खरीदे जाते है तो, इसी मिल्क रेकार्डिंग के आधार पर पशु विशेषज्ञ आपनके नर बछडे / पाड़ा आदि का चयन कर नर वयस्क को बहुत ही अच्छे दामों पर प्रजनन हेतु खरीदते है।


H. जो मादा पशु का प्रतिब्यात रेकार्ड रखते है तथा यंदि उत्पादन अच्छा होता है तो उसको केन्द्रिय योजनाओं के द्वारा आहार खरीदने हेतु अनुदान भी दिया जाता है।


I.कम खर्च अधिक आय :

मिल्क रेकार्ड रखने से ही आपको महसूस होगा कि नस्ल के कम पशु रखने पर मेहनत भी कम करनी पडती है तथा आय भी अधिक होती है।


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