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पशु चिकित्सालय में संधारण होने वाली पत्रावली ( Papers to be maintained in Veterinary Hospital)

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पशु चिकित्सालय में संधारण होने वाली पत्रावली (Papers to be maintained in Veterinary Hospital) किसी भी संस्था की गतिविधियो को सुचारू रूप से चलाने हेतु तथा उन पर खर्च राशि का लेखा जोखा रखने हेतु कुछ पंजिकाओ एवं फाईलो का संधारण करना आवश्यक होता है । ताकी संस्थानो में कार्यरत कर्मचारीयो के कार्य का अवलोकन / मुल्यांकन हो सके। वे सभी पजिकायें निम्न होती है :- 1.आउटडोर पंजिका/ बाह्य रोगी पंजिका (outdoor register) 2.आन्तरण रोगी पंजिका / इनडोर पंजिका (Indoor register) 3.उपस्थिति पंजिका (Attendence register) 4.पत्र आवक पंजिका (receipt letter register) 5.पत्र जावक पंजिका (Despech register) 6.कृत्रिम गर्भाधान पंजिका (Artificial Insemination register) 7.टीकारण पंजिका (Vaccination register) 8.बधियाकरण पंजिका (Castration register) 9.चारा विकास कार्यक्रम पंजिका (Fodder development register) 10.रोकड़ बही (Cash Book ) 11भण्डार पंजिका (Leave register) (अ) स्थाई भण्डार पंजिका (Dead stock\permanent stock  register) (ब) अस्थाई भण्डार पंजिका (consuble stock register) (स) स्टेशनरी भण्ड...

पशु चिकित्सा संस्था के साधारण कार्यो की जानकारी (Knowledge of common functions of Veterinary Society)

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पशु चिकित्सा संस्था के साधारण कार्यो की जानकारी (Knowledge of common functions of Veterinary Society) पशुपालन विभाग सतत् प्रयत्नशील है कि पशु सम्पदा का विकास इस दृष्टि से किया जाये कि, पशुपालक, कृषक तथा पिछड़े वर्ग के परिवारो को रोजगार के उत्तम साधन उपलब्ध हो और उनका उत्पादन बढ़े, ताकि पशुपालक आर्थिक दृष्टि से आत्म निर्भर बन सके, अपना जीवन स्तर सुधार सके, ग्रामीणों का शहरों की तरफ पालयन रूक सके। यह सब तभी संभव है जब पशुपालक का पशुधन सुराक्षत हो, उसके पशुओ के बीमार हो जाने पर चिकित्सा की सम्पुर्ण सुविधा नजदीक से नजदीक अथवा घर पर ही विभाग द्वारा उपलब्ध करवाई जाये और इसके लिए राजस्थान सरकार पशुपालन विभाग के माध्यम से निम्न सुविधा उपलब्ध करवा रही है- पशुओं की चिकित्सा सेवाएं। पशुओं में उन्नत नस्ल के फोजन सीमन द्वारा कृत्रिम गर्भाधन सेवाए। पशुओं को संक्ामक रोगों की मुक्त्त के समय-समय पर टीकाकरण। नाकारा नर पशुओं का बंधियाकरण। संतुलित पशु आहार की जानकारी तथा हरे चारे की उपयोगिता की जानकारी एवं विभाग द्वारा चारा विकास कार्यक्रम के अन्तर्गत हरे चारे के बीज उपलब्ध करवाना आदि। पश...

श्रव्य-दृश्य साधन ( Audio-visual aids)

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श्रव्य-दृश्य साधन  Audio-visual aids श्रव्य दृश्य सहायक साधनो का महत्व :- शिक्षार्थीयो का ध्यान आकर्षित करना ताकि उनमें सिखने कि रूची उत्पन्न करना है। विषय के मुख्य बिन्दुओ को स्पष्ट करने के लिये। भाषा सम्बन्धीत परेशानी को दुर करने मे सहायक होती है। सीखने की प्रक्रिया को अधिक प्रभावशाली ढंग से नियोजित करती है। किसी सन्देश को चित्र या दृश्य की सहायता से प्रस्तुत किया जाये तो उसमें निहीत विचारो की तुलना, विषरण, फैलाव स्पष्ट हो जाता है भाषा की सहायता एवं दृश्य से अवगम तथ्यात्मक होती है। इनसे विचार स्पष्ट ओर सरल होकर समझ में आते है। शिक्षक को अपना विषय क्रमबद्ध संगठित करने में सहायता देती है। सीखने की प्रक्रिया को बढ़ाते है। दृश्य सहायक माध्यम की सहायता से सन्देश को कम समय में एक साथ अनेक लोगों तक पहुचा सकते है। इससे शिक्षक तथा शिक्षार्थी का समय बचता है। A.श्रव्य सामग्री- श्रव्य सामग्री वह शिक्षण साधन है जिससे संदेश केवल सुन सकते है और देख नहीं सकते। 1.टेप रिकार्डर - यह एक श्रव्य यंत्र है। ध्वनि का आलेखन डिस्क पर यांत्रिक विधि से, टेप व तार पर आलेखन चुम्ब...

पशु मेले (Cattle fair)

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पशु मेले  ( Cattle fair) पशु मेला आयोजन के उद्देश्य पशुपालकों को अपने पशुओं के क्रय - विक्रय हेतु बेहतर पशु विपणन सुविधा उपलब्ध करवाना। पशुधन को अधिक समृद्ध एवं उन्नतिशील बनाने की ओर पशुपालकों को ध्यान आकृष्ट करना। पशुपालन व्यवसाय को बेहतर बनाने हेतु पशु मेलों के माध्यम से विमागीय नवीनतम योजनाओं का व्यापक प्रचार-प्रसार करना। सरकारी एवं गैर सरकारी स्तर पर विभिन्न संस्थाओं द्वारा प्रदर्शनी का आयोजन कर नवीनतम वैज्ञानिक जानकारी उपलब्ध करवाना। पशु प्रतियोगिताओं के आयोजन द्वारा पशुपालकों को समृद्ध एवं उन्नत नस्ल के पशुओं को रखने की ओरै प्रेरित करना। मेलों की भाईचारा कायम करने की दिशा में काफी महत्वपूर्ण भूमिका है। पशु मेलों से लाभ- राज्य सरकार को अपने पशुपालन एवं वाणिज्य कर विभाग के माध्यम से आमदनी होगी। पशुपालकों को पशु बेचने में उचित मूल्य मिलता है। व्यापारी व पशुपालक बिना बिचौलियों के अपने पशु व माल का अच्छा मूल्य प्राप्त करते हैं। लोगों का मनोरंजन होता है। यातायात के साधनों के उपयोग से रेल विभाग ट्रक मालिकों तथा परिवहन विभाग को आय, होती है। पशुपालकों का प...

पशु मालिक के लिए परिपत्र ( Circular for animal owner)

पशु मालिक के लिए परिपत्र ( Circular for animal owner) यह एक सरल साधन है जिसे साधन है जिसे आमतौर पर हर जगह पर इस्तेमाल किया जाता है क्योंकि यह अधिक से अधिक लोगों तक सूचना भेजन का कार्य करता है। उद्देश्य परिपत्र को लिखना व भेजना काफी सरल होता है। समय-समय पर होने वाले किसान मेले. टीकाकरण आदि के बारे में जानकारी फैलाने के लिए यह एक सुलभ माध्यम है। परिपत्र के द्वारा पशुपालकों को प्रोत्साहन भी मिलता है। ध्यान रखने योग्य बातें परिपत्र का उद्देश्य व शीर्षक स्पष्ट लिखा जाना चाहिए। परिपत्र को जारी करने की तिथि भी अवश्य लिखनी चाहिए। विभाग का नाम व स्थान भी स्पष्ट लिखा होना चाहिए। दी जाने वाली जानकारी संक्षेप में लिखी होनी चाहिए। भाषा सरल, स्पष्ट व सूचना समय के अनुरुप होनी चाहिए।

पशु मालिक सलाहकार पत्र लेखन ( Animal owner advisory letter writing)

पशु मालिक सलाहकार पत्र लेखन  ( Animal owner advisory letter writing) सलाहकार पत्र के द्वारा पशुपालकों को पशुओं के बारे में उचित जानकारी समय-समय पर पहुँचाई जाती है। ऐसे पत्रों में पशुपालकों को नयी तकनीक या परेशानियों से बचाव के बारे में सलाह दी जाती है। ये पत्र फिल्ड में कार्यरत पशुपालकों को अधिकारियों द्वारा दिये जाते हैं। प्रसार कार्य से सम्बन्धित एजेंसी भी इन पत्रों का समय-समय पर इस्तेमाल करती है। उद्देश्य- पशुपालकों को नई तकनीक व जानकारी की सूचना देने के लिए। किसी विशेष समस्या के निराकरण के बारे में सलाह देने के लिए। समस्या से बचाव के बारे में जानकारी देने के लिए। प्रसार कार्यक्रमों में सहयोग के लिए । ध्यान रखने योग्य बातें- सलाहकार पत्र हमेशा किसी विशेष कार्य के लिए लिखा जाता है। ऐसे पत्र में सन्देश की रूपरेखा पर विशेष ध्यान दिया जाता है। ऐसे पत्र लिखते समय पशुपालकों की परिस्थितियों को ध्यान में रखा जाता भाषा सरल व सहानुभूति पूर्ण होनी चाहिए। पत्र सदैव सामान्य भाषा में लिखना चाहिए । पत्र छोटा व सूचना पूर्ण होना चाहिए।

स्थानीय नेता के चयन की विधियां( Methods for selection of local leader)

स्थानीय नेता के चयन की विधियां  ( Methods for selection of local leader) नेता का चयन निम्न प्रकार किया जा सकता है- 1.निर्वाचन द्वारा - इस विधि में गांव वालों को पहले ही बतला दिया जाता है कि अमुक कार्य हेतु नेता का चयन करना है जिसकी योग्यता यह होनी चाहिए और जब एक से अधिक नाम आते हैं अथवा सबकी प्रत्यक्ष रूप से ही एक व्यक्ति के लिए राय नहीं होती है तो निश्चित समय तय करके निर्वाचन कर लिया जाता है। गुण- नेता चयन शीघ्र हो जाता है। दोश- यह आवश्यक नहीं कि इस प्रकार चुना गया व्यक्ति वास्तविक रूप से नेता ही हो, क्योंकि निर्वाचन अधिकतर जातिवाद, मौहल्लावाद आदि पर होता है। हारा हुआ समूह हमेशा हर काम पर विरोध करेगा, ठीक प्रकार से योजनाओं को चलने नहीं देंगे। धनाद्य (पैसे वाले) व्यक्ति चुनकर आने के बाद भी कार्य के प्रति समर्पित नहीं होते। 2.चयन द्वारा- इस विधि में अधिकारी समूह को कार्यक्रम की सम्पूर्ण जानकारी देता है तथा समूह से विचार विमर्श कर अच्छे व योग्य व्यक्ति का चयन करता है। गुण- कार्यकम की दृश्टि से अच्छे व्यक्ति का चुनाव हो जाता हैं। नेता का चुनाव शी...