राजस्थान के प्रमुख धार्मिक आंदोलन अथवा संत एवं संप्रदाय

भक्ति के तीन मार्ग होते हैं-
1.सगुण भक्ति परंपरा  
2.निर्गुण भक्ति परंपरा
3.मिश्रित भक्ति परंपरा

1.सगुण भक्ति परंपरा
भक्ति का वह मार्ग जिसमें गुणों या साधनों को महत्व देकर ईश्वर की साकार उपासना की जाती है सगुण भक्ति परंपरा कहलाती है।
जैसे मूर्ति, माला, भजन, नृत्य, संगीत आदि को अपनाना।
सगुण भक्ति परंपरा के प्रमुख संत 6 है 
1.मीरा बाई 
2.गवरी बाई 
3.राना बाई 
4.कर्मा बाई
5.सम्मान बाई
6.भक्त कवि दुर्लभ है

2.निर्गुण भक्ति परंपरा
भक्ति का वह मार्ग जिसमें गुणों या साधनों को महत्व न देकर ईश्वर की निराकार उपासना की जाती है निर्गुण भक्ति परंपरा कहलाती है।
निर्गुण भक्ति परंपरा के प्रमुख संत-
जंभोजी
जसनाथ जी
दादू दयाल जी
रज्जब दास जी 
सुंदर दास जी
राम चरण जी
प्राण दास जी 
लाल गिरी जी 
लाल दास जी 
कृपाराम जी 
माधव दास जी 
संत रामदास जी 
हरिराम दास जी आदि..

3.मिश्रित भक्ति परंपरा
भक्ति का भाव मार्ग जिसमें समय की परिस्थिति के अनुरूप सगुण भक्ति परंपरा या निर्गुण भक्ति परंपरा को अपनाना मिश्रित भक्ति परंपरा कहलाता है।
मिश्रित भक्ति परंपरा के प्रमुख संत तीन है 
1.संत मावजी 
2.हरि सिंह सांखला 
3.चरणदास जी

Comments

Popular posts from this blog

पशु मेले (Cattle fair)

प्रक्षेपण के द्वारा प्रदर्शित की जाने वाली दृष्य सामग्री(Visual content displayed by projection)

नेता एंव नेतृत्व ( Leader and leadership)